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सेपà¥à¤¸à¤¿à¤¸ संकà¥à¤°à¤®à¤£ के लिठशरीर की à¤à¤¾à¤°à¥€ और कà¤à¥€-कà¤à¥€ घातक पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ है, जिसके परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प अंग विफलता, ऊतक कà¥à¤·à¤¤à¤¿ और मृतà¥à¤¯à¥ हो सकती है। संकà¥à¤°à¤®à¤£ से लड़ने के लिà¤, रकà¥à¤¤ में सà¥à¤°à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ रसायन बड़े पैमाने पर सूजन का कारण बनते हैं, जिससे रकà¥à¤¤ के थकà¥à¤•े और टपकने वाले बरà¥à¤¤à¤¨ बनते हैं। इससे रकà¥à¤¤ पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ कम हो जाता है, जिससे अंगों को ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ और पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ से वंचित कर दिया जाता है।
गंà¤à¥€à¤° मामलों में à¤à¤• या अधिक अंग विफल हो सकते हैं। सबसे खराब सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में, रोगी का रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª कम हो जाता है, हृदय कमजोर हो जाता है और रोगी सेपà¥à¤Ÿà¤¿à¤• शॉक में चला जाता है, जिसमें कई अंग जलà¥à¤¦à¥€ से विफल हो जाते हैं और यह रोगी के लिठघातक होता है।
सेपà¥à¤¸à¤¿à¤¸ – जिसे रकà¥à¤¤ विषाकà¥à¤¤à¤¤à¤¾ या सिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤®à¤¿à¤• इनà¥à¤«à¤¼à¥à¤²à¤®à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ रिसà¥à¤ªà¥‰à¤‚स सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® (SIRS) à¤à¥€ कहते हैं – à¤à¤• पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤˜à¤¾à¤¤à¤• सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ है जो तब होती है जब किसी संकà¥à¤°à¤®à¤£ के विरà¥à¤¦à¥à¤§ शरीर की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ अपने सà¥à¤µà¤¯à¤‚ के ऊतकों और अंगों को कà¥à¤·à¤¤à¤¿ पहà¥à¤‚चाने लगती है। इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ से आघात (शॉक) लगता है, शरीर के कई अंग खराब हो जाते हैं, और मृतà¥à¤¯à¥ हो जाती है, विशेष रूप से तब जब इसे आरंठमें पहचाना न जाठऔर तà¥à¤°à¤‚त उपचार न किया जाà¤à¥¤
लकवागà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ लोगों में, इसका आरंठकिसी मूतà¥à¤°à¤®à¤¾à¤°à¥à¤—ीय (मूतà¥à¤°à¤¾à¤¶à¤¯ के) संकà¥à¤°à¤®à¤£, निमोनिया, किसी घाव, दबाव से बने घाव या अनà¥à¤¯ संकà¥à¤°à¤®à¤£ के रूप में हो सकता है। यदि संकà¥à¤°à¤®à¤£ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ सà¥à¤¤à¤° पर नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ न हो, तो वह पूरे शरीर में फैल सकता है।
सेपà¥à¤Ÿà¤¿à¤• शॉक गंà¤à¥€à¤° सेपà¥à¤¸à¤¿à¤¸ को कहते हैं जिसमें रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª गिरने के कारण अंग विफल हो जाते हैं। सेपà¥à¤¸à¤¿à¤¸ और सेपà¥à¤Ÿà¤¿à¤• शॉक, दोनों ही पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤˜à¤¾à¤¤à¤• होते हैं। आरंठके à¤à¤• घंटे के अंदर मिलने वाला उपचार सरà¥à¤µà¤¾à¤§à¤¿à¤• सफल होता है।
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